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| - Last Updated on जून 4, 2024 by Neelam Singh
सारांश
एक वेबसाइट द्वारा जारी आलेख के जरिए दावा किया जा रहा है कि माथे पर बिंदी लगाने से अनिद्रा की समस्या ठीक हो सकती है। जब हमने इस पोस्ट का तथ्य जाँच किया तब पाया कि यह दावा बिल्कुल गलत है।
दावा
एक वेबसाइट द्वारा जारी आलेख के जरिए दावा किया जा रहा है कि माथे पर बिंदी लगाने से अनिद्रा की समस्या ठीक हो सकती है। अनिद्रा से दिलाए राहत- अगर आपको अच्छी नींद नही आती है तो, आपके लिए बिंदी लगाना काफी फायदेमंद है। बिंदी बॉडी के अपर पार्ट को शांत बनाए रखने में हेल्प करती है। दरअसल, माथे पर ऐसी मसल्स होती हैं, जिन पर बिंदी लगाने से वह रिलैक्स हो जाती है। यही नहीं, बिंदी एक मसाजर की भूमिका भी प्ले करती है। इस वजह से अच्छी नींद आ जाती है।
तथ्य जाँच
अनिद्रा क्या है?
अनिद्रा एक नींद संबंधी विकार है, जिसमें सोने या सोने के दौरान दोनों में ही कठिनाई होती है। अनिद्रा की समस्या से जूझ रहे लोग अक्सर नींद में कठिनाई का अनुभव करते हैं। जैसे- रात में बार-बार जागना, सुबह जल्दी उठना या जागने पर तरोताजा महसूस ना करना इत्यादि। यह स्थिति दिन में थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और काम या स्कूल में खराब प्रदर्शन का कारण बन सकती है।
अनिद्रा की तीव्रता ज्यादा भी हो सकती है। जैसे – ये अल्पकालिक या दीर्घकालिक हो सकती है। कभी-कभी हफ्तों, महीनों या वर्षों तक बनी रह सकती है।
विभिन्न कारक अनिद्रा का कारण बन सकते हैं, जिसमें तनाव, चिंता, अवसाद, चिकित्सीय स्थितियां, दवाएं, कैफीन या अन्य उत्तेजक पदार्थ, अनियमित नींद की आदतें शामिल हैं। अनिद्रा के उपचार में अंतर्निहित कारणों को संबोधित करना जरूरी हो जाता है। जैसे- स्वस्थ नींद की आदतें अपनाना, संज्ञानात्मक-व्यवहार थेरेपी और कुछ मामलों में दवा शामिल हो सकती है।
क्या माथे पर बिंदी लगाने से अनिद्रा में राहत मिलती है?
नहीं, माथे पर बिंदी लगाने से अनिद्रा में राहत नहीं मिलती है। बिंदी दक्षिण एशिया में, विशेषकर महिलाओं द्वारा पहना जाने वाला एक अलंकृत चिह्न है। यह विभिन्न परंपराओं में सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है। हालांकि, इसमें अनिद्रा या किसी अन्य स्वास्थ्य स्थिति का इलाज करने के लिए कोई ज्ञात चिकित्सीय गुण नहीं है। यदि माथे पर लगी बिंदी वास्तव में अनिद्रा का इलाज कर सकती है, तो इसे केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि हर लिंग के लोगों को लगाना चाहिए।
इसके अलावा, नियमित रूप से बिंदी लगाने वाली महिलाओं में भी अनिद्रा की समस्या होती है। यदि माथे पर बिंदी लगाने से अनिद्रा में मदद मिलती है, तो महिलाओं को इससे ग्रसित नहीं होना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है। हम बिंदी पहनने के पारंपरिक और सांस्कृतिक महत्व का सम्मान करते हैं, लेकिन हमें इसका समर्थन करने के लिए कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है।
अनिद्रा के लिए उचित चिकित्सा मूल्यांकन और उपचार की आवश्यकता होती है। जैसे- अंतर्निहित कारणों को संबोधित करना, स्वस्थ नींद की आदतें अपनाना और कभी-कभी नींद में सुधार के लिए चिकित्सक की देख-रेख में विशेष दवाओं या थेरेपी का उपयोग करना।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इस दावे के बारे में बी.जे. मेडिकल कॉलेज और सिविल अस्पताल, अहमदाबाद से संबद्ध मनोचिकित्सक डॉ. हर्षिल शाह बताते हैं, ”यह पूरी तरह झूठ है। ऐसे दावों के पीछे कोई विज्ञान नहीं है। अनिद्रा का अर्थ है, नींद में खलल पड़ना, जिसमें नींद शुरू करने में या इसे बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है। नींद को ‘Circadian rhythm’ द्वारा नियंत्रित किया जाता है। Circadian rhythm शारीरिक, मानसिक और व्यवहारिक परिवर्तन है, जिसमें एक व्यक्ति 24 घंटे के चक्र में नींद का अनुभव करता है, जिसमें प्रकाश और अंधेरे का सबसे बड़ा प्रभाव पड़ता है लेकिन भोजन का सेवन, तनाव, शारीरिक गतिविधि, सामाजिक वातावरण और तापमान भी इसे प्रभावित करते हैं।”
डॉ. शाह आगे बताते हैं कि इसके अलावा, नींद हमारे मस्तिष्क में ‘पीनियल ग्रंथि’ द्वारा स्रावित ‘मेलाटोनिन‘ नामक हार्मोन द्वारा भी नियंत्रित होता है। मेलाटोनिन मुख्य रूप से नींद-जागने के चक्र को नियंत्रित करता है और वस्तुतः नींद के लिए ‘ऑन’ स्विच के तरह काम करता है, जो मुख्य रूप से सूर्यास्त के बाद और अंधेरे में स्रावित होता है, इसलिए उपरोक्त कारकों के कारण Circadian rhythm में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी और मेलाटोनिन स्राव और विनियमन में गड़बड़ी नींद में खलल डाल सकती है।
डॉ. शाह आगे बताते हैं, “देखा जाए, तो ‘बिंदी लगाने’ और ‘अनिद्रा के इलाज’ के बीच कोई संबंध नहीं है, जो चीजें वास्तव में अनिद्रा के इलाज में मदद कर सकती हैं, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं-
1. निश्चित समय पर सोएं
2. सोने से कम से कम 1 घंटा पहले सभी स्क्रीन बंद कर दें
3. दोपहर की झपकी लेने से बचें
4. हल्के व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें
5. सोने से पहले 15 मिनट तक ध्यान करें
6. सोने से लगभग 30 मिनट पहले कोई अच्छी किताब पढ़ें
7. सोने से पहले गर्म दूध और गर्म पानी से स्नान करने का प्रयास करें
डॉ. शाह कहते हैं, “यदि आपको लगता है कि आप तनावग्रस्त हैं, आप ज़्यादा सोचते हैं या आप उदास या चिंतित महसूस करते हैं और इसलिए सो नहीं पा रहे हैं, तो कृपया ऐसे झूठे दावों पर विश्वास करने के बजाय एक मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से परामर्श लें।”
अनिद्रा के सबसे आम लक्षण क्या हैं और वे दैनिक जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं?
अनिद्रा के सबसे आम लक्षणों में सोने में कठिनाई, बहुत जल्दी नींद का टूट जाना यानी की पर्याप्त नींद ना पड़ना और नींद के बाद तरोताजा महसूस ना करना शामिल है। इन लक्षणों के कारण दिन में थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, खराब याददाश्त, मूड में गड़बड़ी, काम या स्कूल में प्रदर्शन में कमी और जीवन की समग्र गुणवत्ता में कमी हो सकती है।
अनिद्रा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं जैसे- चिंता, अवसाद और हृदय संबंधी समस्याओं के विकास में भी योगदान कर सकती है। इन प्रभावों को कम करने और समग्र कल्याण में सुधार के लिए अनिद्रा का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करना महत्वपूर्ण है।
अगर अनिद्रा का उपचार ना किया जाए, तो उसके दीर्घकालिक परिणाम क्या हैं?
अगर अनिद्रा का उपचार ना किया जाए, तो उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-
शारीरिक स्वास्थ्य संबंधित:
- हृदय संबंधी समस्याएं: लंबे समय तक अनिद्रा से ग्रसित रहने पर उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।
- मधुमेह और मोटापा: नींद की कमी से इंसुलिन प्रतिरोध, वजन बढ़ना और टाइप 2 मधुमेह का खतरा बढ़ सकता है।
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली: लगातार नींद की कमी प्रतिरक्षा प्रणाली को खराब कर सकती है, जिससे शरीर संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है।
- दर्द: अनिद्रा के कारण गठिया और फाइब्रोमायल्गिया जैसी स्थितियां गंभीर हो सकती है, जिससे लगातार दर्द होता है।
मानसिक स्वास्थ्य संबंधित:
- अवसाद और चिंता: अनिद्रा का मूड विकारों से गहरा संबंध है। वहीं जब अनिद्रा का उपचार ना किया जाए, तो ये इन स्थितियों और बढ़ा भी सकती है।
- संज्ञानात्मक हानि: लंबे समय तक नींद की कमी से याददाश्त, एकाग्रता, निर्णय लेने और सीखने में कठिनाई हो सकती है।
- मानसिक विकारों का खतरा बढ़ जाता है: अनिद्रा से bipolar disorder और सिज़ोफ्रेनिया जैसी स्थितियों के विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है।
दैनिक जीवन पर प्रभाव:
- प्रदर्शन में कमी: अनिद्रा के कारण काम या स्कूल में प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे उत्पादकता यानी की प्रोडक्टिविटी कम हो सकती है एवं अधिकांश कामों में गलती होने की संभावना बढ़ सकती है।
- तनावपूर्ण रिश्ते: नींद की कमी के कारण मूड में बदलाव और चिड़चिड़ापन व्यक्तिगत और व्यावसायिक रिश्तों पर असर डाल सकता है।
- जीवन की गुणवत्ता में कमी: दीर्घकालिक अनिद्रा से समग्र जीवन के प्रति संतुष्टि कम हो सकती है।
समग्र स्वास्थ्य जोखिम: अध्ययनों से पता चला है कि अनिद्रा के विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों के साथ जुड़े होने के कारण मृत्यु दर के समग्र उच्च जोखिमों को बढ़ा सकती है।
जीवनशैली की कौन सी आदतें अनिद्रा में योगदान करती हैं?
जीवनशैली की कई आदतें अनिद्रा में योगदान कर सकती हैं। उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-
- अनियमित नींद: हर दिन अलग-अलग समय पर बिस्तर पर सोने जाना और जागना आपकी आंतरिक घड़ी को बाधित कर सकता है, जिससे स्लीप साइकिल यानी को निद्रा चक्र बिगड़ सकती है।
- खराब नींद का माहौल: शोरगुल या असुविधाजनक सोने का माहौल भी सोने की क्षमता में बाधा डाल सकता है।
- कैफीन और निकोटीन: कैफीन और निकोटीनयुक्त पदार्थों का सेवन करना।
- गरिष्ठ भोजन और शराब का सेवन: गरिष्ठ भोजन करना या सोने से पहले शराब का सेवन नींद के चक्र को बाधित कर सकता है।
- शारीरिक गतिविधि की कमी: दिन के दौरान अपर्याप्त शारीरिक गतिविधि से रात में थकान महसूस नहीं होती, जिससे नींद में कमी होती है।
- स्क्रीन पर अत्यधिक समय बिताना: सोने से पहले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग करने से स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी के कारण नींद नकारात्मक तौर पर प्रभावित होती है।
- तनाव और चिंता: तनाव या चिंता के कारण भी आराम करना और सोना मुश्किल हो सकता है क्योंकि मस्तिष्क में वहीं बातें कौंधती रहती हैं, जो नींद में बाधा डाल रही हैं।
विभिन्न आयु समूहों में अनिद्रा की समस्या कितनी प्रचलित है?
अनिद्रा सभी आयु समूहों के लोगों को प्रभावित करती है। हालांकि इसकी व्यापकता अलग हो सकती है।
- बच्चों और किशोरों में: छोटे बच्चों में अनिद्रा की समस्या कम होती है, लेकिन हो सकती है। वहीं किशोरों में अक्सर शैक्षणिक तनाव और सामाजिक दबाव भी अनियमित नींद का कारण बनती है।
- वयस्क: वयस्कों में अनिद्रा काफी आम समस्या है। लगभग 10-30% वयस्क अनिद्रा का अनुभव करते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इसकी दर अधिक होती है।
- वृद्ध वयस्क: अनिद्रा वृद्ध वयस्कों में सबसे अधिक प्रचलित है, जो इस आबादी को 30% से 48% तक प्रभावित करती है। इसके कारण में उम्र से संबंधित बदलाव, चिकित्सीय स्थितियां, दवाएं और जीवनशैली में बदलाव शामिल हैं।
- जनसांख्यिकीय भिन्नताएं: अनिद्रा का प्रसार लिंग, सामाजिक आर्थिक स्थिति और नस्ल/जातीयता के आधार पर भी भिन्न हो सकता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अनिद्रा का अनुभव होने की अधिक संभावना होती है। ऐसा संभवतः हार्मोनल परिवर्तन, देखभाल की ज़िम्मेदारियां और चिंता या अवसाद की उच्च दर के कारण हो सकता है।
- निम्न सामाजिक-आर्थिक स्थिति और कुछ नस्लीय/जातीय पृष्ठभूमि भी अनिद्रा की उच्च दर से जुड़ी हुई है। ऐसा संभवतः बढ़ते तनाव, खराब समग्र स्वास्थ्य और स्वास्थ्य देखभाल संसाधनों तक कम पहुंच के कारण हो सकता है।
कौन से प्राकृतिक उपचार या जीवनशैली में बदलाव अनिद्रा से निपटने में मदद कर सकते हैं?
कई प्राकृतिक उपचार और जीवनशैली में बदलाव अनिद्रा को कम करने में मदद कर सकते हैं। हर दिन एक ही समय पर रात को बिस्तर पर जाना और सुबह में जागना एवं एक नियमित नींद का चक्र बनाए रखना महत्वपूर्ण है। एक आरामदायक नींद का वातावरण बनाना, जो शांत और ठंडा हो, नींद की गुणवत्ता को बढ़ा सकता है।
विशेष रूप से सोने से पहले के घंटे के अंदर कैफीन और अल्कोहल के सेवन को सीमित करना। नियमित तौर पर व्यायाम करना भी बेहतर नींद को बढ़ावा देता है, लेकिन सोने के वक्त व्यायाम करने से बचना चाहिए।
गहरी सांस लेने, ध्यान या योग जैसी विश्राम तकनीकों का अभ्यास करने से तनाव कम हो सकता है और शरीर को नींद के लिए तैयार किया जा सकता है। सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन का समय कम करने से नीली रोशनी के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है, जो सोने की क्षमता में बाधा उत्पन्न कर सकती है। सोते समय आरामदायक दिनचर्या स्थापित करना। जैसे- पढ़ना या गर्म पानी से स्नान करना शरीर को संकेत दे सकता है कि यह आराम करने और सोने के लिए तैयार होने का समय है।
अतः उपरोक्त शोध पत्रों एवं चिकित्सक के बयान के आधार पर कहा जा सकता है कि ये दावा बिल्कुल गलत है। बिंदी लगाना और बिंदी की मदद से अनिद्रा की समस्या के निदान में कोई संबंध नहीं है। बेहतर है कि अनिद्रा की समस्या होने पर उपरोक्त लिखित उपायों को किया जाए एवं चिकित्सक से संपर्क किया जाए, ताकि वे सही उपचार कर सकें।
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