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Fact Check
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से राज्य के कई इलाकों में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबरें सामने आ रही हैं। अब तक इस झड़प में आधिकारिक रूप से 17 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। मृतकों में बीजेपी के 9, टीएमसी के 7 और इंडियन सेक्युलर फ्रंट का 1 सदस्य शामिल है। इसी बीच एक घायल महिला की तस्वीर वायरल है। तस्वीर को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि “आबरू लुट गयी बंगाल की, क्या ये महिला नहीं, क्या बंगाल की बेटी नहीं, क्या बंगाली और महिला केवल ममता ही है। धिक्कार है उनको जो महिला हैं और ममता का अब भी बेशर्मी से समर्थन कर रही हैं।”
घायल महिला की वायरल हो रही तस्वीर को ट्विटर और फेसबुक पर अलग-अलग यूज़र्स द्वारा शेयर किया जा रहा है।
Crowd Tangle टूल की सहायता से किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि वायरल दावे को सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स द्वारा शेयर किया गया है।
वायरल पोस्ट के आर्काइव वर्ज़न को यहां, यहां और यहां देखा जा सकता है।
पश्चिम बंगाल में चल रही राजनीतिक हिंसा को लेकर वायरल हुई घायल महिला की तस्वीर का सच जानने के लिए हमने पड़ताल शुरू की। Google Reverse Image Search की मदद से खंगालने पर हमें 8 नवंबर, 2020 को बांग्ला वेबसाइट Bharat Samachar और ctgpratidin.com द्वारा प्रकाशित की गई रिपोर्ट्स मिली। प्राप्त रिपोर्ट्स में वायरल तस्वीर को अपलोड किया गया है। लेख के मुताबिक वायरल हो रही तस्वीर पश्चिम बंगाल की नहीं बल्कि बांग्लादेश की है। बांग्लादेश के अमन बाज़ार में एक हिंदू परिवार पर मुस्लिमों ने बेरहमी से हमला किया था। हिन्दू परिवार पर हमला करने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की गिरफ्तारी भी नहीं हुई थी।
पड़ताल के दौरान हमें 4 नवंबर, 2020 की एक फेसबुक पोस्ट मिली। पोस्ट के मुताबिक 1 नवंबर, 2020 को बांग्लादेश के अमन बाज़ार में एक हिंदू परिवार पर कुछ मुस्लिम लोगों ने हमला किया था। फेसबुक पोस्ट में आरोपियों का नाम मो. शकील और मो.अरमान बताया गया है। जबकि पीड़ित हिंदू परिवार का नाम अनुकूल मास्टर, मुक्ता देवी और रतन नाथ बताया गया है।
पड़ताल के दौरान हमें joyanta Karmoker नामक एक ट्विटर यूजर द्वारा किया गया एक ट्वीट मिला। यूजर ने घायल महिला की तस्वीरों को ट्वीट करते हुए लिखा गया है, “2 नवंबर, 2020 को हठझारी, चटगांव जिला, बांग्लादेश में जमीन हथियाने के लिए मुस्लिम समुदाय द्वारा एक हिंदू परिवार पर हमला किया गया था।” इस पोस्ट में भी वायरल तस्वीर को पश्चिम बंगाल में चल रही राजनीतिक हिंसा का नहीं बताया गया है।
पड़ताल के दौरान हमें 6 मई, 2021 को पश्चिम बंगाल पुलिस (West Bengal Police) के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किया गया एक ट्वीट मिला। बंगाल पुलिस द्वारा वायरल तस्वीर का खंडन करते हुए उसे फर्ज़ी बताया गया है। पुलिस ने बताया कि वायरल तस्वीर हाल फिलहाल में पश्चिम बंगाल में चल रही राजनीतिक हिंसा की नहीं बल्कि पिछले साल बांग्लादेश में हुए एक हमले की है। इस तस्वीर का पश्चिम बंगाल हिंसा से कोई लेना-देना नहीं है।
वायरल तस्वीर को ध्यान से देखने पर हमने पाया कि जिस कुर्सी पर घायल महिला बैठी हुई है उसपर रीगल (Regal) लिखा हुआ है। Google Keywords Search की मदद से खंगालने पर हमने पाया कि यह बांग्लादेश की एक फर्नीचर ब्रांड कंपनी का लोगो (LOGO) है।
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सोशल मीडिया पर वायरल हो रही घायल महिला की तस्वीर का बारीकी से अध्ययन करने पर हमने पाया कि यह तस्वीर पश्चिम बंगाल की नहीं है। इस तस्वीर का पश्चिम बंगाल में चल रही राजनीतिक हिंसा से कोई लेना देना नहीं है।
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Komal Singh
February 10, 2025
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