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  • Fact Check: दुर्घटना में हुई मौत के मामले में ITR के आधार पर मुआवजा दिए जाने का दावा FAKE और तथ्यहीन दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति के परिवार या उसके आश्रितों को मिलने वाले मुआवजे का संबंधित व्यक्ति की तरफ से भरे गए इनकम टैक्स रिटर्न या आईटीआर फाइल करने से बिल्कुल नहीं है। मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 140 के तहत वाहन मालिकों को एक्ट की दूसरी अनुसूची में वर्णित फॉर्मूले के तहत मुआवजे का भुगतान करना होता है। साथ ही हिट एंड रन मामले में मुआवजा भुगतान टक्कर मारकर भागने मोटर यान दुर्घटना पीड़ित प्रतिकर स्कीम, 2022 के तहत किया जाता है। यह योजना सोलेशियम स्कीम, 1989 की जगह ले चुकी है, जिसे एक अप्रैल 2022 से लागू किया जा चुका है। - By: Abhishek Parashar - Published: Aug 18, 2023 at 02:26 PM नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किए जाने से संबंधित फायदों को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल एक पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि लगातार तीन सालों तक टैक्स फाइल करने वाले किसी व्यक्ति की दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है तो सरकार उस व्यक्ति के परिवार को उसकी सालाना औसत आय का 10 गुना रकम का भुगतान करेगी, क्योंकि यह टैक्स से संबंधित सरकारी नियम है। सोशल मीडिया पोस्ट में इस दावे के समर्थन में मोटर एक्ट 1988 की धारा 166 का जिक्र किया गया है। विश्वास न्यूज ने अपनी जांच में इस दावे को गलत और तथ्यहीन पाया। पोस्ट में किए गए दावों का कोई आधार नहीं है और यह तथ्यों से परे है। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल दुर्घटना की सूचना रिपोर्ट मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 166 के अनुसार, क्लेम ट्रिब्यूनल के रूप में स्वीकार करता है। साथ ही मुआवजे के मामले में किसी निर्धारित और निश्चित राशि का प्रावधान नहीं है, बल्कि यह केस दर केस तथ्यों पर निर्भर करता है। मुआवजे की राशि तय करने के लिए अदालतें कई सारी स्थितियों पर गौर करती हैं। साथ ही वायरल पोस्ट में किए गए दावे के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के एक जजमेंट का हवाला दिया गया है, जो वास्तव में राधाकृष्ण और अन्य बनाम गोकुल व अन्य मामले में दिया गया निर्णय है। इस मामले में दिया गया निर्णय मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के खंडपीठ के फैसले पर दिए गए निर्णय से संबंधित है, जिसमें कोर्ट ने दुर्घटना में मारे गए पीड़ित के परिवार की अपील पर सुनवाई की थी और मुआवजे की रकम को बढ़ाकर करीब सात लाख रुपये कर दिया था और कोर्ट ने इस रकम को तय करने के लिए मृतक की उम्र, मृतक की आय और उस पर निर्भर लोगों की संख्या को आधार बनाते हुए मल्टीप्लायर सिस्टम का इस्तेमाल किया था। स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो मोटर दुर्घटना एक्ट में मृतक के परिवार या आश्रितों को मुआवजा दिए जाने के मामले का इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किए जाने से कोई संबंध नहीं है। साथ ही मोटर दुर्घटना के मामले में दिया जाने वाला मुआवजा औसत आय का 10 गुना नहीं, बल्कि कानून की धारा 163A में निर्धारित सूची के मुताबिक दी जाती है, जो मल्टीप्लायर पर आधारित है। क्या है वायरल? सोशल मीडिया यूजर ‘Dilip Kumar Patnaik’ ने वायरल पोस्ट (आर्काइव लिंक) को शेयर करते हुए लिखा है, ” Why should you file income tax return regularly ????Accidental Death & Compensation: (Income Tax Return Required) Knowledge is Power…. If a person has an accidental death and the person was filing income tax returns for the last three years, then the government is obliged to give * yten times the average annual income of the last three years* to that person’s family. Yes, you will be surprised by this, but this is right and it is Government rule. For example, if someone’s annual income is 4 lakh 5 lakhs and 6 lakhs in the first, second and third years respectively, its average income is ten times of five lakhs.. means fifty Lac rupees, family of that person is entitled to receive from the Government. In the absence of much information, people do not take this claim with the Government. If any return is missing, mainly last three years, this could lower the claim amount or even no claim because court takes ITR as only evidence. NO wealth record, FD’s; business etc. is given that much importance as compared to ITR in the eyes of law. Many a time, people do not file ITRs regularly..or it will be taken lightly.. Due to lack of information the family receives no economic benefits. Source – forwarded Section 166 of the Motor Act, 1988 (Supreme Court Judgment under Civil/ Appeal No. 9858 of 2013, arising out of SLP (c) No. 1056 of 2008) Dt. 31 Oct. 2013. Spread the word. Let someone’s family benefit.” कई अन्य यूजर्स ने इसे समान और मिलते-जुलते दावे के साथ शेयर किया है। पड़ताल वायल पोस्ट में दावा किया गया है कि अगर पिछले तीन लगातार सालों से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर रहा व्यक्ति दुर्घटना में मारा जाता है, तो सरकार मोटर एक्ट, 1988 की धारा 166 के तहत उसके परिवार को तीन सालों की औसत आय का 10 गुना मुआवजा देने के लिए बाध्य है, क्योंकि यह एक कानून है। मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 166 दुर्घटना के लिए मुआवजे के आवेदन से संबंधित है, जिसका जिक्र धारा 165 में किया गया है। मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल दुर्घटना सूचना रिपोर्ट को मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 166 क अनुसार, क्लेम ट्रिब्यूनल के रूप में स्वीकार करता है। इसके लिए अलग से क्लेम या दावा याचिका दायर करने की जरूरत नहीं होती है। यह दावा याचिका दुर्घटना सूचना रिपोर्ट से पहले ही दायर कर दी गई हो तो दुर्घटना सूचना रिपोर्ट उसके साथ संलग्न कर दी जाती है। क्लेम में दूसरा दावा मुआवजे की राशि को लेकर किया गया है। districts.ecourts.gov.in पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, मुआवजे की कोई निश्चित राशि नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक केस के तथ्यों पर निर्भर करता है। मुआवजे की राशि तय करने के लिए अदालत कई तथ्यों पर गौर करती हैं, जिसमें पीड़ित की आयु, आय, उसके ऊपर निर्भर लोगों की संख्या समेत अन्य शामिल हैं। यानी मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 166 वाहन दुर्घटना के मामले में मुआवजा आवेदन की प्रक्रिया से संबंधित है, न कि मुआवजे की राशि से, जिसका जिक्र वायरल पोस्ट में किया गया है। वायरल पोस्ट में मुआवजा राशि को लेकर किए गए दावे के समर्थन में मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 166 के साथ सुप्रीम कोर्ट के एक जजमेंट (Supreme Court Judgment under Civil/ Appeal No. 9858 of 2013, arising out of SLP (c) No. 1056 of 2008) का जिक्र किया गया है। सर्च में हमें सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर इस फैसले की कॉपी मिली, जो राधाकृष्ण और अन्य बनाम गोकुल और अन्य मामले से संबंधित है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दुर्घटना में मारे एक व्यक्ति के परिवार को मिलने वाले मुआवजे की रकम में इजाफा करते हुए स्पष्ट किया था मुआवजे के लिए केवल तीन तथ्यों को स्थापित करना जरूरी है, जिसमें मृतक की आयु, मृतक की आय और और उस पर निर्भर लोगों की संख्या शामिल है। इस आधार पर मल्टीप्लायर फॉर्मूले के तहत मुआवजे को तय करते हुए कोर्ट ने पीड़ित परिवार को करीब सात लाख रुपया मुआवजा दिए जाने का फैसला दिया था। मोटर व्हीकल एक्ट की दूसरी अनुसूची में मुआवजा तय किए जाने के फॉर्मूले का जिक्र है, जिसे यहां देखा जा सकता है। जहां तक मुआवजा दिए जाने मतलब है तो दुर्घटना की वजह से होने वाली स्थायी विकलांगता और मृत्यु के मामले में मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 140 के तहत वाहन मालिक को मुआवजे का भुगतान करना होता है, जिसे अधिनियम की दूसरी अनुसूची में वर्णित फॉर्मूले के तहत किया जाता है। यानी दुर्घटना में मारे गए मृतक के आश्रितों को मिलने वाले मुआवजे का संबंध उसके इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से नहीं है। वायरल पोस्ट को लेकर हमने टैक्स और इन्वेस्टमेंट एक्सपर्ट एवं अपना पैसा के चीफ एडिटर बलवंत जैन से संपर्क किया। उन्होंने बताया, “यह गलत सूचना है, जो काफी समय से वॉट्सऐप पर फैलाया जाता रहा है।” जहां तक बात आईटीआर की है तो मृतक के परिवार को सदस्यों को दिए जाने वाले मुआवजे की गणना के लिए आईटीआर में घोषित आय को ध्यान में रखा जाता है। districts.ecourts.gov.in पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, “कई दुर्घटना मामले में चालक दुर्घटना के बाद वाहन को लेकर फरार हो जाते हैं और यह पता नहीं चलता कि दुर्घटना किस वाहन से हुई। इसकी वजह से वाहन के मालिक और बीमा पॉलिसी के संबंध में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाती है। ऐसी दुर्घटनाओं के मामले में भारत सरकार द्वारा पोषण निधि योजना 1989 बनाई गई है और इस योजना के अंतर्गत दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की मृत्यु होने की दिशा में मृतक के आश्रितों को 50,000 रुपये और गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को 25,000 रुपये दिलाए जाने की व्यवस्था है। इस योजना के तहत संबंधित पीड़ित व्यक्ति अथवा मृतक के आश्रितों द्वारा दुर्घटना के छह माह के भीतर निर्धारित प्रारूप पर प्रार्थना पत्र अधिकृत अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है।” हालांकि, अब इसे बदल दिया गया है। सड़क यातायात और राजमार्ग मंत्रालय ने 25 फरवरी, 2022 को एक अधिसूचना जारी करके हिट-एंड-रन वाहन दुर्घटना के पीड़ितों के मुआवजे के लिये एक नई योजना को अधिसूचित किया है। इस योजना के तहत मुआवजे की धनराशि बढ़ाने, यानी गंभीर रूप से घायल होने पर मुआवजे की राशि को 12,500 रुपये से बढ़कर 50 हजार रुपये तथा मृत्यु होने की स्थिति में मुआवजा राशि 25 हजार रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये करने का प्रावधान किया गया है। मुआवजे के आवेदन और पीड़ितों को भुगतान की प्रक्रिया की समय-सीमा तय कर दी गई है। यह योजना, सोलेशियम स्कीम, 1989 (सांत्वना योजना, 1989) की जगह ले लेगी और एक अप्रैल, 2022 से लागू हो जायेगी। वायरल पोस्ट को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले यूजर की प्रोफाइल फेसबुक पर मई 2012 से मौजूद है और उन्होंने अपनी प्रोफाइल में स्वयं को ओडिशा सरकार का कर्मचारी बताया है। बिजनेस और फाइनैंस से संबंधित अन्य वायरल दावों की जांच करती विश्वास न्यूज की फैक्ट चेक रिपोर्ट्स को यहां पढ़ा जा सकता है। निष्कर्ष: दुर्घटना में मारे गए व्यक्ति के परिवार या उसके आश्रितों को मिलने वाले मुआवजे का संबंधित व्यक्ति की तरफ से भरे गए इनकम टैक्स रिटर्न या आईटीआर फाइल करने से बिल्कुल नहीं है। मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 140 के तहत वाहन मालिकों को एक्ट की दूसरी अनुसूची में वर्णित फॉर्मूले के तहत मुआवजे का भुगतान करना होता है। साथ ही हिट एंड रन मामले में मुआवजा भुगतान टक्कर मारकर भागने मोटर यान दुर्घटना पीड़ित प्रतिकर स्कीम, 2022 के तहत किया जाता है। यह योजना सोलेशियम स्कीम, 1989 की जगह ले चुकी है, जिसे एक अप्रैल 2022 से लागू किया जा चुका है। - Claim Review : ITR फाइल करने वाले व्यक्ति की दुर्घटना में मौत पर उसके परिवार वालों को मिलेगा उनकी औसत आय का 10 गुना मुआवजा। - Claimed By : FB User-Dilip Kumar Patnaik - Fact Check : झूठ पूरा सच जानें... किसी सूचना या अफवाह पर संदेह हो तो हमें बताएं सब को बताएं, सच जानना आपका अधिकार है। अगर आपको ऐसी किसी भी मैसेज या अफवाह पर संदेह है जिसका असर समाज, देश और आप पर हो सकता है तो हमें बताएं। आप हमें नीचे दिए गए किसी भी माध्यम के जरिए जानकारी भेज सकते हैं...
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