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| - Last Updated on फ़रवरी 16, 2024 by Neelam Singh
सारांश
इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि Zombie Deer Disease इंसानों में फैल सकता है। जब हमने इस पोस्ट का तथ्य जाँच किया तब पाया कि यह दावा ज्यादातर गलत है।
दावा
इंस्टाग्राम पर जारी एक वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि Zombie Deer Disease इंसानों में फैल सकता है।
तथ्य जाँच
Zombie Deer Disease क्या है?
Zombie Deer Disease को लेकर कई मीडिया संस्थानों द्वारा विभिन्न तरह की खबरे प्रसारित की जा रही हैं। हालांकि अभी तक इस बीमारी को लेकर कोई आधिकारिक पत्र या आलेख मौजूद नहीं है मगर Centers for Disease Control and Prevention (CDC) के अनुसार क्रॉनिक वेस्टिंग डिजीज – Chronic Wasting Disease (सीडब्ल्यूडी- CWD) एक प्रियन (prion) बीमारी है, जो हिरण, एल्क, रेनडियर, सिका हिरण और मूस को प्रभावित करती है। यह कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका, नॉर्वे और दक्षिण कोरिया सहित उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में पाई गई है।
देखा जाए, तो Zombie Deer Disease और Chronic Wasting Disease के बीच के अंतर को समझना बेहद जरुरी है, जिसके लिए अभी और शोध की आवश्यकता है क्योंकि कोई भी शोध Chronic Wasting Disease को Zombie Deer Disease नहीं कह रहे।
हालांकि किसी संक्रमित जानवर में लक्षण विकसित होने में एक साल से अधिक का समय लग सकता है, जिसमें वजन का तुरंत घटना, लड़खड़ाना, उदासीनता और अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण शामिल हो सकते हैं। यह सभी उम्र के जानवरों को प्रभावित कर सकता है और कुछ संक्रमित जानवर बीमारी विकसित हुए बिना ही मर सकते हैं। यह बीमारी जानवरों के लिए घातक है और इसका कोई उपचार या टीका नहीं है।
क्या ये बीमारी अभी भी अमेरीका में फैल रही है?
शोध बताते हैं कि नवंबर 2023 तक महाद्वीपीय संयुक्त राज्य अमेरिका के कम से कम 31 राज्यों के साथ-साथ कनाडा के तीन प्रांतों में हिरण, एल्क और मूस में इस बीमारी की सूचना मिली है। इसके अलावा नॉर्वे, फिनलैंड और स्वीडन में भी रेनडियर और मूस में CWD की सूचना मिली है। वहीं दक्षिण कोरिया में बहुत कम संख्या में इसके मामले सामने आए है।
क्या Zombie Deer Disease के लिए कोई टीका खोजने पर कोई शोध किया गया है?
देखा जाए, तो अभी तक इस बीमारी के खिलाफ किसी टीके के खोज नहीं हुई है, बल्कि इसके लिए टीके पर शोध जारी है लेकिन अभी तक कोई अनुमोदित टीका नहीं है। इसके टीके को विकसित करने में कुछ चुनौतियां हैं, जैसे- शोध के अनुसार प्रियन (prion) गलत तरीके से मुड़े हुए प्रोटीन हैं और बैक्टीरिया या वायरस के विपरीत उनमें डीएनए या आरएनए नहीं होता है। इससे उन्हें पारंपरिक टीकों से लक्षित करना अविश्वसनीय रूप से कठिन हो जाता है।
क्या ये बीमारी इंसानों में फैल सकती है?
इस दावे को लेकर अभी कोई प्रमाण मौजूद नहीं है, जो यह बताता हो कि ये बीमारी इंसानों में फैल सकती है। देखा जाए, तो जो बीमारी जानवरों से इंसानों में फैलती है, उसे zoonotic बीमारी कहा जाता है लेकिन Zombie Deer बीमारी zoonotic है या नहीं, अभी इस बात को पुष्टि करने के लिए कोई प्रमाण नहीं है।
शोध बताते हैं कि आज तक मनुष्यों में सीडब्ल्यूडी का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन अध्ययनों से पता चला है कि यह हिरण और एल्क के अलावा प्राइमेट्स सहित अन्य जानवरों में भी फैल सकता है। शोध का अनुमान है कि हर साल सीडब्ल्यूडी से संक्रमित 15,000 जानवरों का सेवन किया जाता है, लेकिन वैज्ञानिक निश्चित तौर पर यह नहीं कह सकते कि सीडब्ल्यूडी से प्रभावित हिरणों को खाने से वे मनुष्यों को संक्रमित कर देंगे।
एक अन्य शोध के मुताबिक लोगों में CWD के संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। हालांकि कुछ पशु अध्ययनों से पता चलता है कि CWD कुछ प्रकार के गैर-मानव प्राइमेट्स, जैसे बंदरों के लिए खतरा पैदा करता है, जो इस बीमारी से संक्रमित जानवरों का मांस खाते हैं या संक्रमित हिरण या एल्क के मस्तिष्क या शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में आते हैं। ये अध्ययन चिंता जताते हैं कि लोगों के लिए भी जोखिम हो सकता है। साल 1997 से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सिफारिश की है कि सभी ज्ञात प्रियन रोगों के एजेंटों को मानव खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करने से रोकना महत्वपूर्ण है।
कैसे ये वीडियो भ्रामक जानकारी फैला सकता है?
जिस प्रकार इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि ये बीमारी इंसानों में फैल सकती है, उससे ये पता चलता है कि इस वीडियो को लोगों में डर की स्थिति उत्पन्न करने के लिए प्रकाशित किया गया है। साथ ही पहली बार अगर कोई व्यक्ति इस वीडियो को देखता है, तो उसे लगेगा कि अब ये बीमारी इंसानों में फैल सकती है।
साथ ही spaceastrooo नाम से बनाई गई इंस्टाग्राम प्रोफाइल में कोई बॉयो भी मौजूद नहीं है, जो उस प्रोफाइल की प्रमाणिकता को सिद्ध करता हो। साथ ही उस प्रोफाइल में युट्युब की लिंक भी मौजूद है, जहां कई प्रकार के दावे किए गए हैं, लेकिन उनकी पुष्टि नहीं है। ऐसे में इस दावे पर भरोसा करना कठिन है क्योंकि दावा करने वाले व्यक्ति की पहचान ही सामने नहीं आ रही।
पशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक अरोड़ा बताते हैं कि “Zombie Deer Disease’ को ‘Chronic Wasting Disease’ (CWD) कहा जाता है। यह एक न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसे आमतौर पर ‘प्रियन रोग’ कहा जाता है। सबसे आम रूप जो हमने पहले सुना था वह ‘Bovine spongiform disease’ या mad cow disease कहा जाता था।”
उन्होंने आगे कहा कि हमें याद रखना चाहिए कि प्रियन रोगों की incubation अवधि लंबी होती है और इसके लक्षण दिखने में 1 वर्ष तक का समय लग सकता है। सभी लक्षण न्यूरोलॉजिकल प्रकृति के होते हैं, जिनमें वजन कम होना (wasting), लड़खड़ाना शामिल है, जबकि कुछ जानवर बिना कोई लक्षण दिखाए भी मर सकते हैं।
यद्यपि CWD के Zoonotic प्रसार या मनुष्यों में घटना पर नैदानिक साक्ष्य की कमी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन CWD जैसी प्रियन बीमारी को खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करने से रोकने के लिए सभी सावधानियां बरतने की सलाह देता है। CWD संक्रमित जानवरों का मांस खाना संक्रमण का सबसे आम स्रोत है। प्रियन का संचरण शरीर के तरल पदार्थ जैसे लार, मल, रक्त या मूत्र के माध्यम से हो सकता है। साथ ही इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है।
अतः उपरोक्त शोध पत्रों एवं चिकित्सक के बयान के आधार पर कहा जा सकता है कि यह दावा ज्यादातर गलत है। इसे केवल लोगों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न करने के लिए साझा किया गया है।
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