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| - बिहार से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (Pappu Yadav) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है. इस वीडियो में पप्पू यादव अपनी गाड़ी में बैठे मीडिया से बात कर रहे हैं. इस दौरान वो भावुक होते देखे जा सकते हैं. दावा किया जा रहा है कि ये वीडियो नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद का है.
वीडियो को शेयर करने वालों ने लिखा, 'पप्पू यादव आज शाम में लॉरेंस बिश्नोई को ठिकाने लगा रहे थे, पता ना किसी ने पास्ते में इन्हें कूट दिया जोर-जोर से रो रहे हैं.'
क्या ये सच है ? : ये दावा गलत है. ये वीडियो साल 2018 का है. इसमें मुजफ्फरपुर में प्रदर्शनकारियों द्वारा कथित हमले के बाद पप्पू यादव को रोते हुए दिखाया गया है.
हमने ये सच कैसे पता लगाया ? : हमने वीडियो को अलग-अलग स्क्रीनशॉट में बांटा और उनमें से कुछ पर गूगल रिवर्स इमेज सर्च किया.
हमें 6 सितंबर 2018 को क्विंट हिंदी पर अपलोड हुआ एक यूट्यूब वीडियो मिला.
वायरल क्लिप में 0:39 सेकेंड्स पर, यादव को भावुक होते देखा जा सकता है. इससे ये भी साबित होता है कि ये वीडियो सिद्दीकी की हत्या से पहले का है.
2018 में NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, उस साल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में किए गए बदलावों के विरोध में 6 सितंबर 2018 को देशव्यापी हड़ताल का आयोजन किया गया था.
पप्पू यादव ने मीडिया को बताया कि महिला सुरक्षा वॉकथॉन के लिए जाते समय, मुजफ्फरपुर में प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने उन्हें रोक लिया और उन पर हमला किया. इस रिपोर्ट में यादव के वैसी ही गाड़ी में बैठे विजुअल्स हैं, जैसा कि वायरल वीडियो में है.
अमर उजाला ने भी साल 2018 में इस मामले पर रिपोर्ट पब्लिश की थी.
क्यों हुए थे प्रदर्शन ?: सितंबर 2018 में, उच्च जाति के 35 समूहों ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम में किए गए बदलावों के विरोध 'भारत बंद' का ऐलान किया था.
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यसभा ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को पलटने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दी, जिसमें अधिनियम के तहत आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की अनुमति देने वाले प्रावधान को खत्म कर दिया गया था, जिसमें गिरफ्तारी से पहले पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच अनिवार्य कर दी गई थी.
निष्कर्ष: प्रदर्शनकारियों के हमले के बाद भावुक हुए पप्पू यादव का एक पुराना वीडियो इस गलत दावे से शेयर किया जा रहा है कि ये बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद का है.
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