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| - Last Updated on नवम्बर 13, 2023 by Neelam Singh
सारांश
सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि टूथपेस्ट का इस्तेमाल करने से कैंसर का खतरा बढ़ता है। जब हमने इस पोस्ट का तथ्य जाँच किया तब पाया कि यह दावा ज्यादातर गलत है।
दावा
सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए दावा किया जा रहा है कि टूथपेस्ट का इस्तेमाल करने से कैंसर का खतरा बढ़ता है।
तथ्य जाँच
‘कैंसर’ शब्द का क्या अर्थ है और इसके कारण क्या हैं?
कैंसर एक जटिल बीमारी है, जो शरीर के भीतर असामान्य कोशिकाओं के अनियंत्रित विकास और प्रसार के कारण होती है। हालांकि शोध द्वारा कैंसर के विभिन्न कारकों और कार्सिनोजेन्स की पहचान की गई है, जो कैंसर कारक बनते हैं। कार्सिनोजेन चाहे वे रासायनिक, जैविक या भौतिक प्रकृति के हों, कैंसर कोशिकाओं के विकास को शुरू करने या बढ़ावा देने में भूमिका निभाते हैं। सामान्य कार्सिनोजेन्स के उदाहरणों में तंबाकू का धुआं, पराबैंगनी विकिरण और बेंजीन जैसे कुछ रासायनिक यौगिक शामिल हैं। हालांकि कैंसर पर वैज्ञानिक अध्ययन लगातार किए जा रहे हैं, ताकि कैंसर के बारे में और जानकारियां जुटाई जा सकें।
मौखिक स्वच्छता यानी की ओरल हाइजिन बनाए रखने में टूथपेस्ट की क्या भूमिका है?
सामान्यतः टूथपेस्ट का इस्तेमाल मुंह को साफ-सुखरा बनाए रखने के लिए किया जाता है। यह पेस्ट या जेल के रूप में आता है। आमतौर पर टूथब्रश के जरिए ही टूथपेस्ट को दांतों तक पहुंचाया जाता है। टूथपेस्ट कई प्रमुख सामग्रियों से बना होता है, जैसे – फ्लोराइड, सोडियम लॉरिल सल्फेट, प्रोपलीन ग्लाइकोल, ग्लिसरीन, सोर्बिटोल, सिलिका ट्रेस, कैल्शियम कार्बोनेट और जाइलिटोल। फेसबुक पर जारी वीडियो में सोडियम लॉरियल सल्फेट की बात की गई है।
सोडियम लॉरिल सल्फेट क्या होता है?
सोडियम लॉरिल सल्फेट (एसएलएस) एक प्रकार का सर्फेक्टेंट होता है, जो गंदगी और तेल को तोड़ने का काम करता है। इसका उपयोग आमतौर पर शैंपू, टूथपेस्ट और अन्य व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों में किया जाता है। यह एक प्रभावी क्लींजर है, लेकिन यह कुछ लोगों में त्वचा और आंखों के लिए परेशानी का सबब भी बन सकता है।
क्या सोडियम लॉरिल सल्फेट के कारण कैंसर होने की संभावना होती है?
शोध बताते हैं कि इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि टूथपेस्ट में मौजूद सोडियम लॉरिल सल्फेट (एसएलएस) कैंसर का कारण बनता है। हालांकि कुछ अध्ययनों से पता चला है कि यह मसूड़ों और मौखिक ऊतकों को परेशान कर सकता है। इससे जलन, सूजन और अन्य समस्याएं हो सकती हैं, जैसे दांतों में सड़न और मसूड़ों की बीमारी।
हालांकि यदि आप सोडियम लॉरिल सल्फेट के संभावित खतरों के बारे में चिंतित हैं, तो आप ऐसा टूथपेस्ट चुन सकते हैं जिस पर “एसएलएस-मुक्त” का लेबल लगा हो। बाज़ार में अनेक एसएलएस-मुक्त टूथपेस्ट उपलब्ध हैं। अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन (एडीए) ने कहा है कि सोडियम टूथपेस्ट में उपयोग के लिए सुरक्षित है। एडीए का यह भी कहना है कि एसएलएस और कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं है।
डॉ. शिवानी सिंह मेहता, डेंटल प्रभारी, एमजीएम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, सीबीडी बेलापुर, नवी मुंबई ने बताया कि टूथपेस्ट में ट्राईक्लोसन, एस्पार्टेम और पैराबेंस जैसे कुछ तत्व हो सकते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि टूथपेस्ट अभी भी मौखिक स्वच्छता बनाए रखने और स्वस्थ मसूड़ों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं इसलिए, सलाह दी जाती है कि टूथपेस्ट का चयन सावधानी से करें और उपयोग से पहले उसमें मौजूद सामग्री को जरुर पढ़ें।
किसी तरह की मेडिकल संबंधित परेशानियों से जूझ रहे व्यक्तियों को टूथपेस्ट का उपयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए। साथ ही टूथपेस्ट को निगलने से बचना चाहिए। इसके अलावा किसी तरह की समस्या होने पर चिकित्सक से सलाह लेना आवश्यक है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो, टूथपेस्ट में सोडियम लॉरिल सल्फेट की सुरक्षा पर मिश्रित साक्ष्य हैं। कुछ अध्ययनों से पता चला है कि यह मसूड़ों और मौखिक ऊतकों को परेशान कर सकता है, जबकि अन्य ने सोडियम लॉरिल सल्फेट और कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं बताया है। यदि आप सोडियम लॉरिल सल्फेट के संभावित खतरों के बारे में चिंतित हैं, तो आप सोडियम लॉरिल सल्फेट-मुक्त टूथपेस्ट चुन सकते हैं।
अतः उपरोक्त शोध पत्रों एवं चिकित्सक के बयान के आधार पर कहा जा सकता है कि यह दावा ज्यादातर गलत है।
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