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  • Fact Check: चार किडनियां उपलब्ध होने वाला फर्जी मैसेज वायरल सोशल मीडिया पर चार किडनियां उपलब्ध होने वाला मैसेज फर्जी है। यह करीब पांच साल पहले भी वायरल हो चुका है। इस तरह के मैसेज के झांसे में नहीं आना चाहिए। - By: Sharad Prakash Asthana - Published: Jan 4, 2023 at 04:30 PM नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि एक हादसे में दंपती की मृत्यु हो जाने के बाद डॉक्टरों ने उनको ब्रेन डेड घोषित कर दिया है। उनका परिवार चारों किडनियां दान करना चाहता है। मैसेज में ऊपर डी बी सिंह का नाम दिया गया है, जबकि नीचे तीन मोबाइल नंबर दिए गए हैं। इसको पोस्ट कर यूजर्स इन्हें भावनात्मक रूप से शेयर करने की अपील कर रहे हैं। विश्वास न्यूज ने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल मैसेज फर्जी है। यह वर्ष 2017 से कई बार सोशल मीडिया पर शेयर किया जा चुका है। इसका एक नंबर उपयोग में नहीं है, जबकि एक नंबर स्विच ऑफ है। वहीं, पहला नंबर मेरठ के एक डॉक्टर का है, जो कॉल नहीं उठा रहे हैं। क्या है वायरल पोस्ट में विश्वास न्यूज के टिपलाइन नंबर +91 95992 99372 पर हमारे यूजर जयंत ने यह मैसेज भेजा। इसमें लिखा है, D B Singh प्रिय सभी दोस्तों खास बात यह है कि 4 किडनी उपलब्ध हैं। कल एक दुर्घटना में हमारे परिवार के भाई श्री सुधीर और उनकी पत्नी की मृत्यु हो जाने के कारण डॉक्टर ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया है। श्री सुधीर B+ हैं और उनकी पत्नी O+ हैं। उनका परिवार मानवता के लिए अपनी किडनी दान करना चाहता है। कृपया प्रसारित करें। जय भीम, जय संविधान, जय जोहार 9837285283 पर संपर्क करें 9581544124 8977775312 किसी दूसरे ग्रुप में फॉरवर्ड करें, हो सकता है किसी की मदद हो जाए फेसबुक यूजर Ragini Singh (आर्काइव लिंक) ने भी 15 दिसंबर को इस तरह का मैसेज पोस्ट किया है। पड़ताल वायरल दावे की पड़ताल के लिए हमने सबसे पहले पोस्ट में दिए गए मोबाइल नंबरों पर फोन किया। इनमें से पहले नंबर पर बेल गई, लेकिन फोन नहीं उठा। दूसरा नंबर बंद, जबकि तीसरा इस समय उपयोग में नहीं है। इसके बाद फेसबुक पर इससे संबंधित पोस्ट को कीवर्ड से सर्च किया। दिसंबर 2017 (आर्काइव लिंक) में भी इस तरह की पोस्ट हो चुकी है। उसमें मोबाइल नंबर बस एक ही था। मतलब यह हाल-फिलहाल की नहीं है। गूगल पर इस बारे में कीवर्ड से सर्च करने पर हमें 9 दिसंबर 2019 को द हिंदू पर छपी खबर मिली। एक वॉट्सऐप संदेश वायरल हो रहा है। इसमें लिखा है कि प्रिय मित्रों, चार गुर्दे उपलब्ध हैं। वे कल की दुर्घटना के शिकार सुधीर और उनकी पत्नी (मेरे दोस्त के सहयोगी) के हैं, जिन्हें डॉक्टर ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया है। सुधीर B+ है और उनकी पत्नी O+ हैं। उनके परिवार ने किडनी दान करने का फैसला किया है। (इसमें तीन नंबर दिए गए हैं। उनमें से एक कोई उठाता नहीं है, दूसरा बंद है जबकि तीसरा मौजूद नहीं है। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के पूर्व राज्य पदाधिकारी डॉ. सल्फी नूहू का कहना है कि सरकार द्वारा अंग प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई ‘मृतसंजीवनी’ के इतने साल बाद भी इस तरह के संदेश शरारत के अलावा और कुछ नहीं हैं। यह लोगों में अंगदान के तरीके को लेकर भ्रम पैदा करता है। अब भी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि अंगदान कैसे करते हैं। एक ट्रांसप्लांट सर्जन ने कहा कि वॉट्सऐप या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंगदान नहीं किया जा सकता है। ऑनमनोरमा की वेबसाइट पर 5 सिंतबर 2021 को छपी रिपोर्ट के अनुसार, चार किडनियां उपलब्ध वाला मैसेज फॉरवर्ड करके आप इंसानियत को नहीं, बल्कि एक स्कैम को बढ़ावा दे रहे हैं। पुलिस ने चेताया है कि गैंग इस तरह के मैसेज को पैसों की ठगी करने के लिए सर्कुलेट कर रहा है। check4spam वेबसाइट पर भी इस बारे में हमें जानकारी मिली। 5 नवंबर 2018 को छपी रिपोर्ट के मुताबिक, वेबसाइट ने पहले नंबर पर जब फोन किया तो जवाब आया कि यह पोस्ट पूरी तरह से गलत है। किसी ने शरारत के तौर पर इसे वायरल किया है। इसे नजरअंदाज कीजिए। 3 अप्रैल 2018 को द हिंदू में छपी खबर के मुताबिक, मेरठ के नेफ्रोलॉजिस्ट संदीप कुमार गर्ग का सेल फोन पिछले साल सितंबर से लगातार बज रहा है। कॉल करने वालों के पास एक प्रश्न है: क्या गुर्दे बिक्री के लिए उपलब्ध हैं? एक फर्जी मैसेज डॉ. गर्ग के नंबर के साथ भेजा जा रहा है, जिसमें एक दंपती को हादसे के बाद ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया है और उनकी चारों किडनियां दान देने की बात की गई है। डॉ. गर्ग ने बताया कि कुछ दिन में उनके पास 500 से अधिक मिस्ड कॉल आ चुकी हैं। उनके नंबर के साथ कई मैसेज भेजे गए हैं। उन्हें नहीं पता कि यह किसने किया है। उन्होंने मेरठ के मेडिकल कॉलेज थाने में लिखित शिकायत की है, लेकिन उन्होंने मामले की जांच नहीं की है। उनका दावा है कि कई लोगों ने उनके नंबर पर मैसेज किया है कि वे अंगों को खरीदने के लिए कितना भी पैसा खर्च कर सकते हैं। उन्होंने अपने एक कर्मचारी को फोन सौंप दिया है, और उसे केवल फोन पर सेव नंबरों से कॉल उठाने के लिए कहा है। उन्होंने अपने दूसरे नंबर का उपयोग करना शुरू कर दिया है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए हमने मेरठ के स्थानीय पत्रकार केपी त्रिपाठी से बात की। उनका कहना है, ‘डॉ. संदीप गर्ग मेरठ के रहने वाले हैं। कुछ साल पहले इनका नंबर इस्तेमाल करके किडनियां उपलब्ध होने वाला मैसेज वायरल हुआ था। मेरी उनसे बात हुई है। उन्होंने भी इसको फर्जी बताया है।‘ नेशनल हेल्थ पोर्टल के अनुसार, अंगदान में केवल नजदीकी रिश्तेदारों को दाताओं के तौर पर स्वीकार किया जाता है। इसमें माता-पिता, बच्चे, भाई-बहन, पोते और दादा-दादी (मानव अंग और ऊतक प्रतिरोपण अधिनियम, 2014) शामिल हैं। जीवनसाथी (पति/पत्नी) को भी जीवित दाता के रूप में मंजूर किया गया है। इनके अलावा अन्य लोग, जो रिश्तेदार नहीं हैं, प्राप्तकर्ता को स्नेह या किसी अन्य कारण से अंग डोनेट कर सकते हैं। फर्जी मैसेज वायरल करने वाले फेसबुक यूजर ‘रागिनी सिंह‘ की प्रोफाइल को हमने स्कैन किया। इसके मुताबिक, वह दिल्ली में रहती हैं। निष्कर्ष: सोशल मीडिया पर चार किडनियां उपलब्ध होने वाला मैसेज फर्जी है। यह करीब पांच साल पहले भी वायरल हो चुका है। इस तरह के मैसेज के झांसे में नहीं आना चाहिए। - Claim Review : हादसे में दंपती के ब्रेन डेड होने के बाद चार किडनियां उपलब्ध हैं। - Claimed By : FB User- Ragini Singh - Fact Check : झूठ पूरा सच जानें... किसी सूचना या अफवाह पर संदेह हो तो हमें बताएं सब को बताएं, सच जानना आपका अधिकार है। अगर आपको ऐसी किसी भी मैसेज या अफवाह पर संदेह है जिसका असर समाज, देश और आप पर हो सकता है तो हमें बताएं। आप हमें नीचे दिए गए किसी भी माध्यम के जरिए जानकारी भेज सकते हैं...
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