बागपत में एक किशोरी के अपहरण और गैंगरेप के सम्बंध में गिरफ्तार हुये आरोपी मुस्लिम समुदाय के है ऐसा गलत दावा सोशल मीडिया में किया जा रहा है। लेकिन बागपत के एस.पी. ने इस दावे को गलत बताया है।
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सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के लिए अकसर सोशल मीडिया पर झूठी खबरें और अफवाहें फैलायी जाती है। फैक्ट क्रेसेंडो ने ऐसी कई झूठी खबरों की जाँच कर उनकी सच्चाई अपने पाठकों तक पहुंचाई है। हालही में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बागपत (Baghpat) में एक लड़की के साथ हुये दुष्कर्म की खबर सामने आयी है। इसी से सम्बंधित एक समाचार लेख की तस्वीर इंटरनेट पर तेज़ी से वायरल हो रही है। इस लेख में बागपत में एक लड़की के साथ हुये दुष्कर्म की खबर छपी है। इसके साथ दावा किया जा रहा कि दो मुस्लिम समुदाय के लड़कों ने दिन दहाडे एक हिंदू परिवार के घर में जबरन घुसकर एक 15 वर्षीय लड़की को अगवाह किया फिर उसके साथ दुष्कर्म किया।
नीचे दिये गये वायरल फेसबुक पोस्ट में लिखा है, “क्या बागपत यूपी (भारत) में ही है? डरे हुए लोगों के काम – 65% हिंदुओ वाले रामला गांव में पिता घर से बाहर थे तभी गाँव के 2 जिहादी जबदस्ती हिन्दू घर में घुसे, दिन दहाड़े 15 वर्षीय लड़की को अगवा कर साथ ले गए। रात भर लड़की से बलात्कार किया और सुबह उसको घर के पास छोड़ कर चले गये।“ (शब्दश🙂 और इस कैप्शन के साथ एक समाचार पत्र का एक लेख भी इस यूज़र ने साझा किया है।
यह प्रचार सिर्फ फेसबुक तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अन्य सोशल मीडिया वेबसाइटों पर भी यह दावा वायरल किया जा रहा है। नीचे दिया गया ट्वीट इसका एक उदाहरण है, इसी तरह सोशल मीडिया में यह खबर तेज़ी से फैलायी जा रही है।
इसलिये इस खबर की जॉंच कर, असलियत का पता लगाने की हमने कोशिश की। हमारे जॉंच में जो भी तथ्य सामने आये वो कुछ इस प्रकार थे…
अनुसंधान से पता चलता है कि…
सबसे पहले हमने इस तस्वीर में दिख रहे समाचार लेख को ध्यान से पढ़ने की कोशिश की। उसमें हमने यह लिखा हुआ पाया कि उत्तर प्रदेश में स्थित बागपत के रमाला क्षेत्र के एक गांव में दो लड़को ने संप्रदाय विशेष के घर में घुसकर एक 15 वर्षीय लड़की को अगवाह किया और उसके साथ दुष्कर्म कर अगले दिन उसे बदहवास हालत में वापस घर छोड़कर भाग गये। इस लेख में यह भी लिखा है कि पुलिस इसपर कार्रवाई कर रही है। गौर कीजियेगा कि इस रिपोर्ट में कही भी किसी का भी नाम व धर्म नहीं बताया गया है।
खबर में दी गयी जानकारी की मदद से हमने गूगल पर कीवर्ड सर्च किया। हमने पाया कि इस वर्ष 29 नवंबर को जागरण ने इस मामले के सम्बंध में एक रिपोर्ट अपने वेबसाइट पर प्रकाशित की है। रिपोर्ट के मुताबिक, बागपत के एक गांव में दो लड़कों ने संप्रदाय विशेष की लड़की को उसके घर से अगवा कर लिया व उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म कर उसे बदहवास हालत में छोड़कर भाग गये। यह घटना इस वर्ष 28 नवंबर को हुयी है। जिस लड़की के साथ दुष्कर्म हुआ वह नाबालिग है। पुलिस ने मामले की कार्रवाई करते हुये दो आरोपियों को हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक इनके नाम परमजीत सिंह व प्रशांत है।
फिर फैक्ट क्रेसेंडो ने बागपत के एस.पी नीरज कुमार जादौनी से संपर्क किया व उनसे इस मामले की जानकारी मांगी, उन्होंने हमें बताया कि “इस मामले में दोनों ही आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सोशल मंचों पर इस मामले से सम्बंधित पीड़िता और आरोपियों के धर्म के बारे में जो दावा किया जा रहा है वह गलत है।“
उन्होंने हमें बागपत पुलिस के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल का लिंक भी उपलब्द कराया जहाँ उन्होंने इस दावे का खंडन किया है। उसमें भी उन्होंने साफ तौर पर लिखा है कि थाना रमाला में इस वर्ष 29 दिसंबर को पंजीकृत इस मामले में जो सांप्रदायिक कोण से दावा किया जा रहा है वह भ्रामक है। यह ट्वीट उन्होंने इस वर्ष 3 दिसंबर को किया था।
जाँच के दौरान हमें बागपत पुलिस द्वारा किया गया एक और ट्वीट मिला। उसमें उन्होंने आरोपियों की तस्वीर और एक प्रेस नोट भी जारी की है। ट्वीट में लिखा है कि पोक्सो एक्ट के तहत रमाला थाना की पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इस प्रेस नोट में उन्होंने दोनों आरोपियों के नाम दिये है। एक का नाम है प्रशांत और दूसरे का नाम है परमजीत।
यह ट्वीट उन्होंने इस वर्ष 1 दिसंबर को किया है।
निष्कर्ष: जाँच में पाये गये तथ्यों से हमें पता चलता है कि सोशल मीडिया पर बागपत में एक नाबालिग लड़की से हुये सामूहिक दुष्कर्म के मामले से जोड़कर मुसलमानों के खिलाफ किया जा रहा सांप्रदायिक दावा गलत है। जहां दुष्कर्म की घटना सच है, वही यह दावा कि इसमें संलिप्त आरोपी मुस्लिम समुदाय से है सरासर गलत है।
Title:बागपत में घटे सामुहिक दुष्कर्म के एक मामले को सोशल मीडिया पर झूठे दावे के साथ फैलाया जा राहा है; पढ़ीयें सच…Fact Check By: Rashi Jain
Result: Partly False