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| - सोशल मीडिया पर कई तस्वीरों का एक सेट शेयर किया जा रहा है, जिनमें से ज्यादातर तस्वीरों में हथियार दिख रहे हैं. कुछ तस्वीरों में तलवारें और कुछ में पुलिस के साथ खड़े कुछ लोग दिख रहे हैं.
क्या है दावा?: इन तस्वीरों को शेयर करने वाले कई यूजर्स ने दावे में लिखा है कि ये सभी तस्वीरें उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बिजनौर की हैं. जहां 6 मौलवियों को गिरफ्तार किया गया है और इनके पास से एलएमजी मशीन मिली है जो एक बार में 8 हजार राउंड फायर कर सकती है.
सच क्या है?: ये बात सच है कि यूपी के बिजनौर में साल 2019 में एक मदरसे से हथियार निकले थे.
लेकिन वायरल तस्वीरों में से सभी तस्वीरें उस घटना की नहीं हैं. सिर्फ एक तस्वीर जिसमें आगे पुलिस ऑफिसर बैठे दिख रहे हैं. वहीं तस्वीर बिजनौर की है. बाकी तस्वीरें अलग-अलग जगह की हैं. और इनके साथ शेयर हो रहा वायरल दावा गलत है.
इसके अलावा, हथियारों की जो संख्या बताई जा रही है वो भी गलत है. क्योंकि मदरसे से इतनी बड़ी संख्या में हथियार नहीं बरामद हुए थे.
हमने सच का पता कैसे लगाया?: हमने अलग-अलग तस्वीरों को रिवर्स इमेज सर्च कर उनका सच पता लगाया. यहां सभी तस्वीरों पर अलग-अलग नजर डालते हैं.
दावे में ये पूरा मामला बिजनौर का बताया जा रहा है, इसलिए हमने बिजनौर से जुड़ी ऐसी रिपोर्ट ढूंढने के लिए गूगल पर कीवर्ड सर्च किया.
इससे हमें बिजनौर पुलिस का एक ट्वीट मिला, जिसे 11 जुलाई 2019 को ट्वीट किया गया था.
इस ट्वीट में इस्तेमाल की गई तस्वीरों में से एक तस्वीर वो भी है जो वायरल दावे में दिख रही है.
ट्वीट कैप्शन के मुताबिक, तब बिजनौर पुलिस ने मदरसे में अवैध हथियारों की तस्करी करते 6 लोगों को पकड़ा था और इस कार्रवाई में उन्हें 1 पिस्टल, 4 तमंचे और भारी मात्रा में कारतूस मिले थे.
इस घटना से जुड़ी कई रिपोर्ट्स भी हमें मिलीं.
यहां से ये तो साफ है होता है कि ये फोटो बिजनौर की है, लेकिन ये दावा गलत है कि वहां एलएमजी जैसे हथियार मिले थे. इसके अलावा, ये घटना 4 साल पुरानी है, हाल की नहीं.
एक साथ रखी कई तलवारों की तस्वीर:
इस फोटो से जुड़ी पड़ताल क्विंट की वेबकूफ टीम पहले भी कर चुकी है. साल 2019 में यही फोटो गुजरात के राजकोट की बताकर शेयर की गई थी.
तब हमने पड़ताल में पाया था कि ये फोटो पटियाला की एक कृपाण फैक्ट्री की है.
तब फैक्ट्री के मालिक बचन सिंह ने क्विंट से पुष्टि की थी कि ये फोटो उनके कृपाण गोदाम की है, जहां से वो इन कृपाणों को पूरे पंजाब में सप्लाई करते हैं.
ये पूरी पड़ताल आप यहां पढ़ सकते हैं.
सोफे पर रखी बंदूकों की तस्वीर:
इस फोटो को रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें ये फोटो 'mehrzadalavinia' नाम के एक इंस्टाग्राम अकाउंट पर मिली.
इसे बिजनौर की घटना से भी करीब 3 महीने पहले अप्रैल 2019 में पोस्ट किया गया था.
हालांकि, हमें इस फोटो के ओरिजनल सोर्स के बारे में पता नहीं चला, लेकिन ये साफ है कि ये फोटो बिजनौर वाले घटना का नहीं है.
हमने इंस्टाग्राम अकाउंट के बायो के मुताबिक, ये अकाउंट ईरान के किसी यूजर का है.
पुलिसकर्मियों के सामने टेबल में रखी तलवारों से जुड़ी तस्वीर:
इस तस्वीर को रिवर्स इमेज सर्च करने पर हमें हूबहू यही तस्वीर तो नहीं मिली, लेकिन हमें एक और तस्वीर मिली जो इसी दावे के साथ कई दूसरे यूजर्स ने शेयर भी किया है.
ये तस्वीर Guajarat Headline नाम की एक वेबसाइट की एक रिपोर्ट में इस्तेमाल की गई थी.
5 मार्च 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, ये हथियार गुजरात के राजकोट में एक स्टोर से बरामद किए गए थे. और इस घटना के सिलसिले में 5 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था.
इसके अलावा, इस घटना से जुड़ी दूसरी न्यूज रिपोर्ट्स भी हमें मिलीं.
इस तस्वीर और वायरल हो रही तस्वीर के बीच तुलना करने पर साफ पता चलता है कि ये दोनों तस्वीरें एक ही जगह की हैं.
क्या ऐसी किसी घटना से जुड़ी हाल की रिपोर्ट है?: हमने ऐसी न्यूज रिपोर्ट्स की भी तलाश की जिनमें ऐसी किसी घटना का जिक्र हो कि यूपी के बिजनौर में हथियारों का जखीरा निकला है. लेकिन हमें ऐसी किसी घटना की हाल कि रिपोर्ट नहीं मिली.
निष्कर्ष: साफ है कि यूपी के बिजनौर में एक मदरसे में 6 लोगों को हथियारों के साथ गिरफ्तार तो किया गया था, लेकिन ये घटना हाल की नहीं बल्कि 4 साल पुरानी है.
इसके अलावा, जैसा दावे में बाकी तस्वीरों का इस्तेमाल कर ये बताने की कोशिश की गई है कि वहां हथियारों का जखीरा मिला था. वो भी सच नहीं है क्योंकि रिपोर्ट्स के मुताबिक, मदरसे में 1 पिस्टल और 4 तमंचों के साथ भारी मात्रा में कारतूस मिले थे.
(अगर आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी आती है, जिसके सच होने पर आपको शक है, तो पड़ताल के लिए हमारे वॉट्सऐप नंबर 9643651818 या फिर मेल आइडी webqoof@thequint.com पर भेजें. सच हम आपको बताएंगे. हमारी बाकी फैक्ट चेक स्टोरीज आप यहां पढ़ सकते हैं)
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