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  • Last Updated on मार्च 15, 2024 by Neelam Singh सारांश सोशल मीडिआ पर जारी एक पोस्ट में वर्ष २०२३ के पोस्टर को इंगित करते हुए लिखा गया है कि National Deworming जरूरी है। हालांकि यह पोस्ट सीधे तौर पर कृमि मुक्ति की बात नहीं करती, जो स्वास्थ्य से संबंधित हो बल्कि दो नेताओं को कृमि बताते हुए, उससे मुक्ति की बात करती है। ऐसे में जब हमने इस पोस्ट का तथ्य जाँच किया तब पाया कि यह दावा बिल्कुल गलत है। यहां इस गलत सूचना से तात्पर्य उस जानकारी से है, जो सत्य से उत्पन्न होती है लेकिन तोड़ मरोड़ कर पेश की जाती है, जो गुमराह करती है और संभावित नुकसान पहुंचाती है। दावा X पर जारी एक पोस्ट के जरिए दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रीय तौर पर कृमि मुक्ति यानी कि National Deworming जरूरी है। हालांकि यह पोस्ट सीधे तौर पर कृमि मुक्ति की बात नहीं करती, जो स्वास्थ्य से संबंधित हो बल्कि दो नेताओं को कृमि बताते हुए, उससे मुक्ति की बात करती है। तथ्य जाँच पोस्ट में क्या दिखाया गया है? पोस्ट में साल 2023 की न्यूज की कटिंग है, जिसे साल 2024 में लोकसभा चुनाव से एकदम पहले लोगों में भ्रम फैलाने, गलत जानकारी देने एवं जान-बूझकर आपसी सौहार्द को बिगाड़ने के लिए साझा किया जा रहा है। इस पोस्ट के कमेंट्स सेक्शन में तरह-तरह के विरोधाभासी कमेंट्स मौजूद हैं, जो दो नेताओं को इंगित करते हुए उन्हें देश के लिए कीड़ा यानी की कृमि की संज्ञा दे रहे हैं। जैसे- इस कमेंट को देखे- ऐसे में किसी आम नागरिक द्वारा इन कमेंट्स को देखकर तो यही कयास लगाए जा सकते हैं कि इस पोस्ट में दो नेताओं को कृमि मुक्ति दिवस पर हटाने की बात कही गई है। इसके अलावा इस पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा Basavaraj S Bommai भी मौजूद हैं, जो कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में Basavaraj S Bommai तो फिलहाल सत्ता में सक्रिय नहीं हैं, तो उन्हें किस सत्ता से हटाने की बात हो सकती है? इससे एक बात तो बिल्कुल स्पष्ट है कि इस पोस्ट का उद्देश्य आगामी लोकसभा चुनाव 2024 में लोगों को गुमराह करने का है। नेताओं को चुनना या न चुनना कैसे संभव है? किसी भी नेता को कृमि मुक्ति दिवस से नहीं बल्कि अपने वोट देने की शक्ति से सत्ता में लाया जा सकता है या सत्ता से बाहर किया जा सकता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत वोट देने के अधिकार की गारंटी भारत के संविधान द्वारा दी गई है। इस विशेष अधिकार का प्रयोग करने के लिए प्रत्येक नागरिक को 18 वर्ष की आयु प्राप्त करनी होगी। 1950 में ‘सार्वभौमिक मताधिकार’ की अवधारणा के तहत भारत के नागरिकों को पूर्ण मतदान अधिकार की गारंटी दी गई थी। अतः उपरोक्त जानकारी के आधार पर कहा जा सकता है कि यह दावा बिल्कुल गलत है।
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