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| - Fact Check: बांग्लादेश में मंदिर पर हमले के नाम से वायरल हुए दो भ्रामक वीडियो, एक मजार का है और दूसरा पश्चिम बंगाल का
बांग्लादेश में मंदिर पर हमले के नाम से दो वीडियो वायरल हो रहे हैं। इनमें से एक वीडियो बांग्लादेश में मजार पर हुई तोड़फोड़ का है, जबकि दूसरा वीडियो पश्चिम बंगाल के सुल्तानपुर के एक मंदिर का है, जहां परंपरा के तहत हर 12 साल बाद देवी की मूर्ति को तोड़कर विसर्जित कर दिया जाता है और उसकी जगह नई मूर्ति स्थापित की जाती है।
- By: Sharad Prakash Asthana
- Published: Dec 3, 2024 at 03:56 PM
नई दिल्ली (विश्वास न्यूज)। बांग्लादेश में मची उथल-पुथल के दौरान सोशल मीडिया पर दो वीडियो वायरल हो रहे हैं। इनमें एक वीडियो में कई लोगों को एक निर्माण को तोड़ते हुए दिखाया गया है, जबकि दूसरे वीडियो में कुछ लोग देवी की मूर्ति को तोड़ते दिख रहे हैं। इन दोनों वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि बांग्लादेश में मुस्लिमों ने मंदिर पर हमला करके वहां तोड़फोड़ की।
विश्वास न्यूज की जांच में पता चला कि पहला वीडियो बांग्लादेश में मजार में हुई तोड़फोड़ का है। जबकि दूसरा वीडियो पश्चिम बंगाल के एक मंदिर का है। दरअसल, पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले में स्थित एक मंदिर में परंपरा के तहत 12 साल बाद मां काली की मूर्ति को तोड़कर उसे विसर्जित किया जाता है। दूसरा वीडियो उसी परंपरा का है। दोनों वीडियो को शेयर कर गलत दावा किया जा रहा है।
क्या है वायरल पोस्ट?
एक्स यूजर Manish Kasyap Son Of Bihar ने 2 दिसंबर को वीडियो को शेयर (आर्काइव लिंक) करते हुए इसे बांग्लादेश में मंदिर पर हुए हमले का बताया।
फेसबुक यूजर ने Pushpendra Kulshrestha Fans ने एक अन्य वीडियो पोस्ट (आर्काइव लिंक) करते हुए दावा किया कि यह बांग्लादेश में मंदिर पर हुए हमले का है।
पड़ताल
दोनों वीडियो के बारे में हमने अलग-अलग सर्च किया।
पहला वीडियो
पहले वीडियो के कीफ्रेम निकालकर उसे गूगल लेंस से सर्च करने पर फेसबुक यूजर প্রবাসী জীবন की प्रोफाइल पर वायरल वीडियो मिला। इसे 29 अगस्त को अपलोड किया गया है। पोस्ट के साथ जानकारी दी गई है कि यह वीडियो अली हजरत बाबा अली पगला की मजार की है, जो काजीपुर में स्थित है।
फेसबुक यूजर দরবারে মাইজভান্ডার ने इससे मिलते-जुलते वीडियो को 29 अगस्त को शेयर किया है। इसमें वायरल वीडियो में दिख रहे निर्माण और तोड़फोड़ करते लोगों को देखा जा सकता है। इसमें भी वायरल वीडियो को काजीपुर में स्थित मजार का बताया गया है।
वायरल वीडियो की जानकारी के लिए हमने बांग्लादेश के प्रोबश टाइम्स के न्यूज एडिटर अराफात से संपर्क किया। उन्होंने वायरल वीडियो को मजार पर हुई तोड़फोड़ का बताया।
उन्होंने कालबेला डॉट कॉम की एक खबर का लिंक भी भेजा। इसमें प्रयोग की गई तस्वीर में तोड़फोड़ करते शख्स को देखा जा सकता है। खबर के अनुसार, सिराजगंज के काजीपुर में ग्रामीणों ने दरगाह में तोड़फोड़ को लेकर मस्जिद के इमाम को बर्खास्त कर दिया। इमाम गुलाम रब्बानी और उनके समर्थकों ने 29 अगस्त को अली पगला की दरगाह में तोड़फोड़ की थी।
बांग्लादेश के फैक्ट चेकर तनवीर महताब आबिर ने भी इस वीडियो को बांग्लादेश के काजीपुर में स्थित मजार में तोड़फोड़ का बताया।
इससे यह साफ हो गया वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। वीडियो किसी मंदिर पर हमले का नहीं, बल्कि मजार में हुई तोड़फोड़ का है।
दूसरा वीडियो
दूसरे वीडियो में लोगों को देवी की मूर्ति को तोड़ते हुए दिखाया गया है। इसका कीफ्रेम निकालकर उसे गूगल लेंस से सर्च करने पर हमें इंस्टा यूजर sumanhalder8951 की प्रोफाइल पर वायरल वीडियो मिला। इसे 28 नवंबर को शेयर करते हुए सुल्तानपुर का बताया गया है। इसमें लिखा है, 12 साल बाद काली मां का विसर्जन।
इस कीवर्ड के आधार पर सर्च करने पर इंस्टा यूजर alone_boy_aakash_20k द्वारा शेयर किया गया वीडियो मिला। यह वायरल वीडियो से मिलता-जुलता है और 27 नवंबर को शेयर किया गया है। इस पर लिखा है, 12 साल बाद मां ने त्याग दिया, अब फिर आई मां।
जॉब सर्च यूट्यूब चैनल पर 30 नवंबर को अपलोड वीडियो में वायरल वीडियो के एक हिस्से को दूसरे एंगल से देखा जा सकता है। वीडियो में मंदिर और बाहर जमा भीड़ भी दिख रही है। इस वीडियो को सुल्तानपुर में हर 12 वर्ष बाद होने वाली परंपरा का बताया गया है।
दैनिक स्टेट्समैन न्यूज की वेबसाइट पर 21 अक्टूबर को छपी खबर के अनुसार, पश्चिम बंगाल के बर्धमान के सुल्तानपुर में 12 साल बाद मां काली को भूलने की जद्दोजहद शुरू हो गई है। यह अनोखी पूजा केवल जिले या राज्य में ही नहीं, बल्कि देश में कहीं और नहीं की जाती है। यहां मां के चारों पुत्र-पुत्रियों की एक साथ पूजा की जाती है। यह मूर्ति 12 साल में एक बार बनती है और 12 साल बाद विसर्जित कर दी जाती है। सबसे खास बात यह है कि इस पूजा में सभी धर्म व जाति के लोग भेदभाव भूलकर शामिल होते हैं। मूर्ति का विसर्जन पुरानी परंपरा के अनुसार, मंदिर से सटे कालीमाता तालाब में किया जाएगा। इतनी बड़ी मूर्ति को तालाब में नहीं ले जाया जाएगा। इसे थोड़ा-थोड़ा तोड़कर तालाब के पानी में प्रवाहित कर दिया जाएगा।
बांग्लादेश के फैक्ट चेकर तनवीर महताब आबिर ने कहा कि यह वीडियो बांग्लादेश का नहीं है।
इससे साबित हो गया वायरल वीडियो पश्चिम बंगाल के सुल्तानुपर में एक मंदिर की परंपरा का है, जिसे गलत दावे से वायरल किया जा रहा है।
29 नवंबर को एएनआई के एक्स हैंडल से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जासवाल का वीडियो बयान पोस्ट किया गया है। इसके अनुसार, भारत सरकार ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर मामला उठाया है। साथ ही वहां अल्पसंख्यकों को सुरक्षा प्रदान करने को लेकर कहा गया है।
30 नवंबर को टाइम्स ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर छपी खबर के अनुसार, बांग्लादेश के चटगांव में तीन और मंदिरों में तोड़फोड़ की गई, जिसे पुलिस ने ‘दो समूहों के बीच टकराव’ का मामला बताया। चटगांव के पाथरघाटा में हरीश चंद्र मुनसेफ लेन के पास शांतनेश्वरी मातृ, शनि और शांतनेश्वरी कालीबाड़ी मंदिरों पर हमला किया गया। शनि मंदिर को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि अन्य दो मंदिरों के द्वार क्षतिग्रस्त हो गए। पुलिस ने नुकसान को ‘मामूली’ बताया और कानून-व्यवस्था भंग होने के लिए दो समूहों को ‘एक-दूसरे पर ईंटें फेंकने’ का दोषी ठहराया।
वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर करने वाले एक्स यूजर की प्रोफाइल को हमने स्कैन किया। एक विचारधारा से प्रभावित यूजर के 1 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं।
निष्कर्ष: बांग्लादेश में मंदिर पर हमले के नाम से दो वीडियो वायरल हो रहे हैं। इनमें से एक वीडियो बांग्लादेश में मजार पर हुई तोड़फोड़ का है, जबकि दूसरा वीडियो पश्चिम बंगाल के सुल्तानपुर के एक मंदिर का है, जहां परंपरा के तहत हर 12 साल बाद देवी की मूर्ति को तोड़कर विसर्जित कर दिया जाता है और उसकी जगह नई मूर्ति स्थापित की जाती है।
- Claim Review : बांग्लादेश में मुस्लिमों ने मंदिर पर हमला करके वहां तोड़फोड़ की।
- Claimed By : X User- Manish Kasyap Son Of Bihar
- Fact Check : भ्रामक
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