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| - सारांश
एक सोशल मीडिआ पोस्ट के जरिए दावा किया गया है कि लोकसभा चुनाव 2024 में भीषण गर्मी के कारण लाखों मतदाताओं की जान खतरे में है। जब हमने इस पोस्ट का तथ्य जाँच किया तब पाया कि यह दावा ज्यादातर गलत है।
दावा
एक विदेशी अख़बार द्वारा अपने X अकाउंट पर कहा गया है कि भारत देश लोकसभा चुनावों के दौरान “भीषण गर्मी” की तैयारी कर रहा है, जबकि सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इस कारण लाखों मतदाताओं कि जान खतरे में है और इससे मतदान भी प्रभावित हो सकता है।
तथ्य जाँच
क्या भीषण गर्मी के कारण मतदान प्रभावित हुए है?
यह अभी स्पष्ट नहीं है क्योंकि मतदान केवल गर्मी की प्रचंडता पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि यह मतदाताओं की इच्छा, उनके स्वास्थ्य, निजी कारण या अपने क्षेत्र से दूर रहने के कारण भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में केवल गर्मी को मतदान प्रभावित होने के लिए एकमात्र कारण मान लेना तार्किक नहीं है
देखा जाए, तो पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल 2024 को पूरा हो गया है। दूसरा चरण, 26 अप्रैल 2024 को, तीसरा चरण, 07 मई को, चौथा चरण, 13 मई और पांचवा चरण, 20 मई 2024 को हो चुका है। छठे चरण के लिए 25 मई 2024 को मतदान होना है और सातवे चरण के लिए 01 जून 2024 को मतदान होना है।
चुनाव आयोग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार आम चुनाव 2024 के छठे चरण में 63.37% मतदान दर्ज किया गया है। पांचवें चरण के मतदान में लगभग 60.09% मतदान दर्ज किया गया। पहले चार चरणों में 66.95% मतदान, चौथे चरण के लिए 67.25%, , तीसरे चरण में 65.68%, दूसरे चरण में 66.71% और पहले चरण में 66.14% का मतदान हो चुका है। ये सारी जानकारियां विस्तृत रूप से चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपल्बध है।
क्या मतदान के दौरान लाखों मतदाताओं की जान वाकई खतरे में थी?
नहीं। यह सच है कि भारत के उत्तरी राज्यों में मई व जून में भीषण गर्मी होती है परन्तु जनमानस के रोजमर्रा के कार्य निरंतर चलते रहते हैं। भारत एक विशाल राज्य है और इसमें जलवायु विविधता पायी जाती है। अब जबकि मतदान अंतिम चरण मे है, यह उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव 2024 में मतदाताओं से सम्बंधित किसी दुर्घटना की कोई खबर देखने को नहीं मिली है जो बताती हो कि मतदान के दौरान मतदाता को भीषण गर्मी के कारण स्वास्थ्य संबंधित दिक्कत हुई हो। हालांकि हमें केरल से एक खबर मिली है, जिसमें लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदान के बाद चार लोगों की मौत हो गई। मृतकों में तीन मतदाता थे और एक मतदान कर्मी था मगर इनकी मौत का कारण फिलहाल पता नहीं चल पाया है।
क्या चुनाव आयोग ने गर्मी से बचने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे?
चुनाव आयोग द्वारा विभिन्न पोलिंग बूथ, चुनावी प्रक्रियाओं के लिए एक विशेष गाइडलाइन निकाली गई है। इस गाइडलाइन में मौजूद विशेष बिंदू की बात करें, तो मतदानकर्मियों के लिए निम्नलिखित शामिल है-
- दोपहर 12 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक धूप में निकलने से बचना
- प्यास ना भी लगे, तो भी नियमित अंतराल पर पानी का सेवन करना
- यात्रा के दौरान पानी की बोतल साथ लेकर चलना
- अत्यधिक प्रोटीन और बासी भोजन करने से परहेज करना, इत्यादि।
इसके अलावा गाइडलाइन में कुछ अन्य निर्देश भी जारी किए गए हैं, जिसका सभी पोलिंग बूथ पर पालन होना जरुरी है। जैसे-
- मेडिकल किट: यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पर्याप्त संख्या में मेडिकल किट/प्राथमिक चिकित्सा किट जिसमें दवाएं और सामान शामिल हैं।
- गर्मी के दौरान प्रत्येक पोलिंग बूथ पर ORS मुहैया कराना ताकि अगर किसी मतदाता को हीट-स्ट्रोक की समस्या हो, तो दिया जा सके।
- ‘क्या करें और क्या न करें’ पर एक handout का वितरण
अतः यह कहा जा सकता कि यह पूर्वानुमान लगाना कि भीषण गर्मी में चुनाव करने से लाखों मतदाताओं की जान खतरे में हो सकती है, ज्यादातर गलत है। इस बार पहली बार मई जून में चुनाव नहीं हुए हैं अपितु पिछले चार लोकसभा चुनाव इसी मौसम में आयोजित किये जा चुके हैं। भारत एक विशाल देश है और भारतीय चुनाव आयोग हर प्रकार कि परिस्थिति/मौसम में चुनाव करने के लिए सक्षम है। यहाँ उल्लेखनीय है कि इस बार चुनाव आयोग ने दूर-दराज के इलाकों में जाकर लोगों के मतदान करने के लिए प्रेरित किया है, जैसे- ग्रेट निकोबार के विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूह, शोम्पेन ने पहली बार अपना वोट डाला है। और चुनाव सुचारु रूप से संपंन्न हों इसके लिए चुनाव आयोग ने सभी प्रकार के उपाय कर रखे थे।
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