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| - Fact Check : यूपी के गाजीपुर की पांच साल पुरानी घटना को अभी का बताकर फैलाई जा रही है अफवाह
पांच साल पहले यूपी के गाजीपुर में हुई घटना को अभी का बताकर शेयर किया जा रहा है, जबकि उस वक्त संबंधित पुलिसवालों पर कार्रवाई हो चुकी है। मामला कोर्ट में है।
By: Ashish Maharishi
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Published: Feb 12, 2025 at 05:15 PM
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नई दिल्ली (Vishvas News)। सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट वायरल हो रही है। इसमें दावा किया जा रहा है कि गाजीपुर में एक दलित दारोगा ने ब्रह्मभोज आयोजित करने पर एक ब्राह्मण परिवार पर क्रूरता की हदें पार दी। पोस्ट के साथ दो तस्वीरों को भी वायरल किया जा रहा है।
विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट की जांच की। पता चला कि पांच साल पहले यूपी के गाजीपुर में हुई घटना को अभी का बताकर शेयर किया जा रहा है,जबकि उस वक्त संबंधित पुलिसवालों पर कार्रवाई हो चुकी है। मामला कोर्ट में है। वायरल पोस्ट का खंडन गाजीपुर पुलिस की ओर से भी किया गया है। हमारी पड़ताल में पता चला कि पांच साल पुराने मामले को अभी का बताकर वायरल करके भ्रम फैलाया जा रहा है।
क्या हो रहा है वायरल
फेसबुक यूजर Rajesh Kumar Tunna ने 10 फरवरी को दो तस्वीरों को पोस्ट करते हुए लिखा, “उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में एक दलित दरोगा ने ब्रह्मभोज आयोजित करने पर एक ब्राह्मण परिवार पर क्रूरता की हदें पार कर दी, दलित दरोगा ने राम राम बोलने पर मुहं में जूता डाला और कहा की राम राम नहीं जय भीम बोल, आर्मी जवान समेत कई ब्राह्मणों की चमड़ी भी उधेडी और ये भी कहा की मैं पुलिस में ब्राह्मणों और क्षत्रियों को ठीक करने के लिए ही भर्ती हुआ हूँ। इस पुलिस दरोगा का नाम है रमेश कुमार, ये गाजीपुर के नूरपुर स्थित हालत थाने का दरोगा है, सेना के एक जवान ने अपनी माता का श्राद्ध आयोजित किया था, श्राद्ध में ब्रह्मभोज आयोजित किया गया था। दरोगा रमेश कुमार ने इसी के चलते सैनिक और उसके परिवार के कई लोगो को थाने में बंद कर दिया और थाने में सबको बुरी तरह मारा, इनकी चमडियाँ उधेड़ दी, दर्द से जब पीड़ितों ने राम राम बोला तो दलित दरोगा और भड़क गया और बोला की “सालों राम राम नहीं जय भीम बोलो, मैं तुम ब्राह्मणों, क्षत्रियों को ठीक करने के लिए ही पुलिस में भर्ती हुआ हूँ”। पिटाई से पीड़ितों कि चमड़ी तक उधड़ गई। वहीं जातिवाद की धुन में पागल यह दरोगा सिर्फ इतने तक ही नहीं रुका बल्कि इसने झूठे आरोपों में चालान कर परिवार के 9 पीड़ितों को जेल भेज दिया। जब पीड़ितों की तस्वीरें देखी तो हमारी भी रूह काँप गयी। भला कौन पुलिस वाला इतना क्रूरता बरत सकता है। वहीं मेडिकल कराने की बजाये पीड़ितों को जेल भेज दिया गया।किसी तरह पीड़ितों ने कोर्ट से जमानत हासिल करी। जमानत हासिल करने के बाद भी जब पीड़ितों ने FIR दर्ज कराने के लिए थाने का रुख किया तो माँ बहन की गालिया बकते हुए बेइज्जत करके व झूठे मुक़दमे में फ़साने की धमकी देते हुए उन्हें थाने से भगा दिया गया। पीड़ितों में सबसे अधिक गंभीर हालत सुशील पांडेय की हैं जो देश की सेवा में हर वक़्त तैनात रहते हैं। इसके अलावा इनके भाई संबधी भी सरकारी नौकरी में ही तैनात हैं जिन्हे भी बुरी तरह पीटा गया हैं। गाजीपुर में दलित दरोगा ने राम राम करने पर मुहं में जूता डाला, चमड़ी उधेडी, बोला – राम राम नहीं जय भीम बोल, आर्मी जवान को भी मारा।”
सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर कई अन्य यूजर्स ने इस पोस्ट को समान दावे के साथ शेयर किया है। पोस्ट का आर्काइव वर्जन यहां देखें।
पड़ताल
विश्वास न्यूज ने वायरल पोस्ट की सच्चाई जानने के लिए सबसे पहले संबंधित कीवर्ड से गूगल ओपन सर्च किया। हमें जागरण डॉट कॉम की वेबसाइट पर एक खबर मिली। एक अगस्त 2020 की इस खबर में विस्तार से बताया गया, “गाजीपुर के नगसर हाल्ट पुलिस द्वारा आर्मी के हवलदार सहित नौ लोगों की बर्बरता पूर्वक पिटाई का मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचा। पुलिस को सूचना 26 जुलाई को सूचना मिली कि नुरपुर गांव निवासी राजन उर्फ झनकू पांडेय पर हत्या की नीयत से रिवाल्वर लेकर गांव में घूम रहा है। पुलिस का कहना है कि राजन उर्फ झनकू पांडेय को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम के साथ परिजनों ने मारपीट कर उसे छुड़ा कर भगा दिया। मारपीट में थाना के तीन आरक्षी भी घायल हो गए। पुलिस ने मौके से 32 बोर रिवाल्वर और दो कारतूस बरामद कर पुलिस के साथ मारपीट करने वाले नौ लोगों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया था। पुलिस ने नौ लोगों की थाने में इतनी बर्बरतापूर्वक पीटा कि परिजन अभी भी उससे उबर नहीं पाएं हैं। इनकी बर्बरता की कहानी जख्म के निशान ही बता रहे हैं। इसका फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। इसको लेकर शासन और प्रशासन दोनों की खूब किरकिरी होने लगी और मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गया। प्रमुख के निर्देश पर जिलाधिकारी ओमप्रकाश आर्य नूरपुर गांव निवासी पीडि़त दीपेश पांडेय के परिजनों से मिले। उन्होंने मामले के बारे में आवश्यक जानकारी ली। जिलाधिकारी से परिजनों ने बताया कि जिसे पुलिस गिरफ्तार करने आई थी वह रिवाल्वर लिया हुआ था। हम लोगों ने ना ही उसे छुड़ाया और ना ही पुलिसकर्मियों संग मारपीट की। बावजूद इसके पुलिसकर्मी घर में घुसकर पहले मारे-पीटे इसके बाद इसके बाद थाने पर ले जाकर बर्बरतापूर्वक पिटाई कर दी। इतना ही नहीं, हम लोगों के खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। इसके बाद जिलाधिकारी ने नगसर थानाध्यक्ष रमेश कुमार से भी पूछताछ किए।”
एक अगस्त 2020 की दूसरी खबर में बताया गया, “नूरपुर निवासी दीपेश पांडेय का आरोप है कि बीते 26 जुलाई की शाम अपने पट्टीदार सेवानिवृत्त आर्मी के हवलदार सुशील पांडेय, जम्मू कश्मीर के उरी सेक्टर में तैनात आर्मी के हवलदार कमल कुमार पांडेय, अविनाश पांडेय, निर्भय कुमार पांडेय, इंद्रजीत पांडेय, विशाल पांडेय, भूपेंद्र व विक्की पांडेय के साथ बैठकर 27 जुलाई को बड़ी मां के होने वाले ब्रह्मभोज कार्यकम के तैयारी के बारे में वार्ता कर रहे थे। उसी समय नगसर हाल्ट थाना के थानाध्यक्ष रमेश कुमार पुलिसकर्मी कमलेश, सूरज बिंद, विनोद यादव, रामकृष्ण भुजवा व उपनिरीक्षक कृष्णानंद के साथ पांच से छह लोगों को लेकर सादे वेश में पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए कहे कि तुम लोगों के यहां मुलजिम राजन उर्फ झनकू पांडेय के छिपे होने की जानकारी मिली है। इसके बाद पुलिसकर्मी घर में घुसकर सभी को दौड़ा-दौड़ाकर पीटना शुरू किया और तेरही का सामान नष्ट कर चूल्हा तोड़ दिए। जिससे 50 हजार रुपये का नुकसान हुआ। चीखने-चिल्लाने पर गांव वाले भी एकत्र हो गए। पुलिस वालों ने प्रार्थी व उसके आठ पट्टीदारों को मारते हुए जीप में बैठा दिए। थाने में भी बर्बर तरीके से सभी को मारा-पीटा गया। उनका कहना है कि राजन उर्फ झनकू पांडेय के बारे कोई जानकारी नहीं है और न ही उसको भगाने में कोई सहयोग किया गया है। इसके बावजूद पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ मुलजिम छुड़ाने व पुलिस के साथ मारपीट करने का झूठा मुकदमा लिखकर जेल भेज दिया।”
पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने गाजीपुर पुलिस के एक्स हैंडल को खंगाला। हमें 9 फरवरी 2025 की एक पोस्ट मिली। इसमें वायरल पोस्ट को फर्जी बताते हुए अफवाह नहीं फैलाने की अपील की गई। पोस्ट में बताया गया, “सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (ट्विटर ) पर वायरल पोस्ट, जिसे कतिपय ट्विटर हैण्डल द्वारा वायरल किया जा रहा है, जो लगभग 05 वर्ष पूर्व में घटित घटना का है, जिसे वर्तमान समय का बताकर ट्वीट कर अफवाह फैलाना/भ्रमित किये जाने के सम्बन्ध में। अवगत कराना है कि यह प्रकरण लगभग 05 वर्ष पुराना है। उक्त प्रकरण में अभियोग पंजीकृत किया गया था तथा मजिस्ट्रियल जाँच कराई गई थी । सम्बन्धित पुलिस कर्मियों के विरुद्ध निलम्बन व अन्य विभागीय कार्यवाही कर सम्यक जाँच व नियमानुसार विधिक कार्यवाही पूर्व में की जा चुकी है। अभियोग मा० न्यायालय में विचाराधीन है।अतः आमजनमानस से अपील है कि पूर्व में घटित घटनाओं का ट्वीट करके अफवाह फैलाकर लोगों को भ्रमित कर कानून व्यवस्था प्रभावित न करें।”
पड़ताल के दौरान दैनिक जागरण, गाजीपुर के ईपेपर में हमें एक खबर मिली। 12 फरवरी 2025 की इस खबर में बताया गया कि गाजीपुर के नगसरहाल्ट थाना के नूरपुर गांव में पांच वर्ष पूर्व हुए एक मामले को इंटरनेट मीडिया के प्लेटफार्म एक्स व फेसबुक पर दोबारा पोस्ट कर अफवाह फैलाने वाले पांच एक्स हैंडल व पोस्ट करने वालों के खिलाफ मीडिया सेल ने एफआइआर दर्ज कराया है। मीडिया सेल के हेड कांस्टेबल सन्नी नागर की तहरीर पर एफआइआर दर्ज कर कोतवाली पुलिस जांच कर रही है। पूरी खबर को नीचे पढ़ा जा सकता है।
विश्वास न्यूज ने जांच को आगे बढ़ाते हुए गाजीपुर के एसपी ईरज राजा से संपर्क किया। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि वायरल घटना पांच साल पुरानी है। अब इसे शेयर करके अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
दैनिक जागरण, गाजीपुर के संपादकीय प्रभारी शिवानंद राय ने भी विश्वास न्यूज से बातचीत में बताया कि वायरल पोस्ट में इस्तेमाल की गई घटना पांच साल पुरानी है। हाल-फिलहाल में गाजीपुर में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है।
निष्कर्ष : विश्वास न्यूज की पड़ताल में पता चला कि गाजीपुर में पांच साल पुरानी घटना को अभी का बताकर वायरल किया जा रहा है। गाजीपुर पुलिस की ओर से भी वायरल पोस्ट का खंडन करते हुए कई यूजर्स के खिलाफ केस दर्ज किया जा चुका है।
Claim Review : उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में एक दलित दरोगा ने ब्रह्मभोज आयोजित करने पर एक ब्राह्मण परिवार पर क्रूरता की हदें पार कर दी
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Claimed By : FB User Rajesh Kumar Tunna
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Fact Check : भ्रामक
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